जगतपति ईश्वर करो सहाय दीनदयाल दयानिधि स्वामी अर्ज करूं सिरनाय ॥ टेक ॥ दुस्तर मायाजाल बिछाया...

प्रभु सुम अरज हमारी आज सकल जगत के हो तुम स्वामी दीनबंधु महाराज ॥ टेक ॥...

हरितुम भक्तन के हितकार भवसागर जल दुस्तर भारी लीजे मुझे उबार ॥ टेक ॥ गज अरु...

मुसाफिर चलजाना चलजाना रे यह संसार सराय ॥ टेक ॥ इस सराय की चाल पुराणी इक...

सखीरी सुन बंसी बाज रही जलजमुना के तीर ॥ टेक ॥ चांद चांदनी रात मनोहर शीतल...

प्रभु मेरी अरजी आज सुनो सब जग सर्जनहार ॥ टेक ॥ और न पालक मेरो स्वारथ...

समझ मन झूठा है संसार सुमर सदा हरिनाम ॥ टेक ॥ क्षण भंगुर स्वप्ने की माया...

अजब तेरी उमरा बीत रही कैसे धरे मन धीर ॥ टेक ॥ दिनदिन घडिघडि पलपल जावे...

आना आना रे मोहन मेरी गलियां ॥ टेक ॥ घिस घिस चन्दन लेप लगावूं धोवुं चरनन...

पिया चालो नगरिया हमारी रे ॥ टेक ॥ तुमबिन हारसिंगार न भावे सुने महल अटारी रे...

मत सोना मुसाफिर नींद भरी ॥ टेक ॥ तुम परदेसी भूल पडे हो चोरन की नगरी...

मुझे दीजे दरस गिरधारी रे ॥ टेक ॥ शीश किरीट गले बनमाला कुंडल की छवि न्यारी...