हंसा मत बिछुड़ो सुमिरन से । टेक जो सुमिरन ते आवत नाहीं पूछि लियो हरिजन से...

हंसा प्यारे सरवर तजि कहाँ जाय । टेक जेहि सरवर बिच मोतिया चुगत होते बहु विधि...

हंसा निंदक का भल नाहीं । निंदक के तो दान पुण्य व्रत सब प्रकार मिट जाहीं...

हंसा ऐसो गुरुमत भारी । लखे तो भव में आवत नाहीं भव के बहोत बेगारी ।...

हंसा आप में आप निबेरो । आपन रूप देख आपहि में नौ निधि होवै चेरो ।...

हरिजन चार वरण से ऊँचा । टेक नहिं मानो तो साखि देखाऊँ सेवरी के फल खायो...

हम सम कौन बड़ा परिवारी । टेक सत्य है पिता धर्म है भ्राता लज्जा है महतारी...

हम न मरब मरिहैं संसारा हमका मिला जियावन हारा । टेक साकट मरैं संत जन जीवैं...

सौदा करे सो जाने काया गढ़ में लागल बजार । टेक या काया में हाट लगाये...

सोवता होय जो सोई तो जागिहै जागता सोवता कहाँ जागै । मान मन माहिं अभिमान ग्यानी...

सो मोरे मन कब भजिहो सतनाम । टेक बालापन सब खेल गमायो ज्वानी में व्यापो काम...

सो नैया बिच नदिया डूबी जाय । टेक एक अचम्भा हमने देखा गदहा के दो सींग...