काहू से नेह न करिये हो।  नेह किये निश्चय ही सबही बिनु पावक के जरिये हो।...

काह भये मुख राम कहे से। टेक  अंतर कपट वचन मुख चातुर अति अधीन होय मनन...

कारनि कौन सँवारे देहा यहु तनि जरि बरि ह्वै है षेहा। १  चोवा  चंदन चरचत अंगा...

काया सराय में जीव मुसाफिर काह करत उन्माद रे। रैन बसेरा  कर  ले  डेरा चला सबेरे...

काया बौरी चलत प्राण काहे रोई। काया पाप बहुत सुख कीन्हों नित उठ मल मल धोई।...

काया बौरी चलत प्राण काहे रोई। काया पाप बहुत सुख कीन्हों नित उठ मल मल धोई।...

काया नगर अनूप देख मन भावहीं।  सखी बसत तहँ पाँच कोई लख पावहीं। १  पाँचन  संग...

काया गढ़ नगरिया से गगरिया भरके लावो रे। टेक पवन  के  इनरवा  से सुरति डोरिया लावो...

काया गढ़ जीतो रे भाई तेरो काल अवधि टरि जाई। टेक भरम  कोट  चँहु  ओर फिराये...

काया गढ़ जीतो रे भाई तेरो काल अवधि टरि जाई। टेक भरम  कोट  चँहु  ओर फिराये...

काम की कोथली मूल में जलि गई राम की  कोथली रहे प्यारे। १  राम विश्राम तहाँ...

काम की अग्नि में जीव यों जलत है ग्यान बिचार कछु नाहिं सूझै। १  खोया  परतीत...