कोई हरिजन मिटावै हमार खटका। टेक  वृक्ष  एक  अधर  में जामा जड़  ऊपर  पलई  तरका। १ ...

कोई राम रसिक पीयहुगे पीयहुगे युग जीयहुगे। १ फल लंकृत बीज नहिं बकला शुक पन्छी तहाँ...

कोई कुछ कहे दिल लागा रे। टेक  तन भी लागा मन भी लागा ज्यों सुई बिच...

कोई पियत राम रस प्याला। टेक रसना कटोरी भरि भरि पीवे झुकत फिरे मतवाला। १  सत...

कैसे समझाऊँ मैं न माने मेरी बात रे। टेक  यह मन मूढ़ मधुर अमृत तजि गटकि...

कैसे दिन कटि हैं बताये जइओ। टेक एहि पार गंगा वोही पार जमुना बिचवा मंड़इया हमकाँ...

केते दिन को उठाये ठाट। टेक  जौन यतन तुम देही पाली सो देही मिली माटी खाक।...

कुमतिया दारुण नितहिं लरै। टेक सुमति कुमतिया दूनों बहिनी कुमति देखि कै सुमति डरै। १  औषध...

किस भूल में दिवाना हूआ रे। टेक  माता पिता तेरे सुख के संगी बहन भानजी बुआ...

काहे री नलिनी तू कुंभिलानी तेरे ही नाल सरोवर पानी। टेक  जल में उतपति जल में...

काहे कूं माया करि जोरी। हाथि चूंन गज पाँच पछेवरी। १  ना को  बंधु  न भाई...

काहे कूँ  भीति बनाऊँ टाटी का जानूँ कहाँ परिहैं माटी। १ काहे कूँ मंदिर महल चिनाउं...